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पोर्नोग्राफी को बढ़ावा देती हैं खजुराहो की मूर्तियां!!

Posted On: 28 Jan, 2014 टेक्नोलोजी टी टी में

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विश्व प्रसिद्ध खजुराहो की पेंटिंग्स और मूर्तियों के बारे में कौन नहीं जानता. मध्य प्रदेश की प्रसिद्ध धरोहर खजुराहो को देखने के लिए देश-विदेश से सैलानी यहां आते हैं. इतना ही नहीं खजुराहो की मूर्तियों और कारीगरी को इंटरनेट पर सर्च करने वालों की तादाद भी बहुत अधिक है. लेकिन अब खजुराहो की इंटरनेट सर्चेबिलिटी पर खतरा मंडराने लगा है क्योंकि इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स ने सुप्रीम कोर्ट से पोर्नोग्राफी की विस्तृत परिभाषा और खजुराहो को पोर्न सामग्री के अंदर रखा जाना चाहिए या नहीं जैसे सवालों के जवाब की मांग की है.



khajurahoउल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश जारी किया है कि इंटरनेट पर मौजूद सभी पोर्न वेबसाइट्स को ब्लॉक किया जाए और सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश पर अपना जवाब देते हुए इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स ने यह मांग की है कि सुप्रीम कोर्ट खजुराहो की कारीगरी को पोर्न साइट्स के अंतर्गत रखना है या नहीं इसे परिभाषित करे क्योंकि बिना कोर्ट या सरकार के आदेश के इसे ब्लॉक नहीं किया जा सकता.


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इन्दौर के रहने वाले कमलेश वासवानी ने कोर्ट में एक याचिका के तहत यह मांग की थी कि इंटरनेट पर मौजूद पोर्न साइट्स को ब्लॉक किया जाना चाहिए क्योंकि ऐसी साइटे महिलाओं के प्रति होने वाले यौन अपराधों को और बढ़ावा देती हैं.



इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर (आइएसपी) एसोसिएशन द्वारा सुप्रीम कोर्ट को दिए गए जवाब में यह कहा गया है कि “पोर्नोग्राफी की सार्वभौमिक परिभाषा गढ़ना मुमकिन नहीं है क्योंकि जो चीज किसी के लिए पोर्न सामग्री है वह किसी अन्य व्यक्ति के लिए कला का एक जरिया भी हो सकती है. मेडिकल और एड्स से जुड़ी साइटे बहुत से लोगों के लिए पोर्न हो सकती है लेकिन इन्हें विशुद्ध पोर्न साइट्स मानना भी सही नहीं है. इसलिए यह बात हमारे लिए विवाद का विषय है कि खजुराहो को पोर्नोग्राफी के अंतर्गत रखा जाना चाहिए या नहीं


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सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी निर्देश में चाइल्ड पोर्नोग्राफी से जुड़ी सामग्री को भी ब्लॉक करने का आदेश दिया गया और इस आदेश के प्रति अपना जवाब देते हुए इंटरनेट सर्विस प्रोवाइड एसोसिशन का यह भी कहना है कि हम ना तो कोई साइट बनाते हैं और ना ही कोई सामग्री का प्रमोशन करते हैं, हमारा काम सिर्फ उपभोक्ताओं तक इंटरनेट पर मौजूद सामग्री को पहुंचाना होता है इसलिए इंटरनेट पर क्या और किस तरह की सामग्री मौजूद है इसके लिए हम जिम्मेदार नहीं हो सकते. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बिना अगर खजुराहो और इससे संबंधित वेबसाइट्स को ब्लॉक किया गया तो यह सेंसरशिप के समान माना जाएगा.



सुप्रीम कोर्ट के पोर्न साइट्स को ब्लॉक करने जैसे आदेश के बाद केन्द्र ने यह कहा था कि अंतरराष्ट्रीय स्तर की वेबसाइट्स को इतनी जल्दी और इतनी आसानी से ब्लॉक नहीं किया जा सकता इसलिए उन्हें विभिन्न मंत्रालयों से इन्हें ब्लॉक करने के विषय में बात करनी पड़ेगी जिसके लिए उन्हें थोड़ा समय लगेगा.


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3 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

raksharampandey के द्वारा
January 30, 2014

मेरे दोस्त , जो पर्दे के पीछे है वही पोर्न है , जो पर्दे के आगे है वही कला है , आपका विचार सही है ,किंतु  इंटरनेट जैसी व्यवस्था आग के समान है प्रयोग भी जरुरी है और बचना भी जरुरी है अभी तो यह व्यवस्था अपने प्रथम चरण में ही है अभी इसकी व्यापक परिभाषा और प्रयोग बाकी है , सुंदर विचार हैं

amit के द्वारा
January 30, 2014

आखिर जनरेशन अपनी सेक्सुअलिटी को कहाँ व्यक्तय करे सब कुछ तो over content में आ जाता है. कला और A List वर्ल्डवाइड movies भी

amit के द्वारा
January 30, 2014

आखिर एक जनरेशन अपनी सेंसुअलिटी को कहाँ वयक्त करे . सब तो over कंटेंट में आ जाता है.कला और A list worldwide movies भी.


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